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तहलका की पड़ताल: अब उड़ता राजस्थान? | Pavitra India

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राजस्थान में आजकल ड्रग का गैर-कानूनी धंधा फल-फूल रहा है। तहलका एसआईटी ने अपनी पड़ताल में पता लगाया है कि राजस्थान के अधिकतर शहरों में अवैध रूप से ड्रग्स आसानी उपलब्ध है। ड्रग्स तस्कर, रिसॉर्ट के कर्मचारियों और टूर ऑपरेटर्स ड्रग्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने में नशेड़ियों की मदद करते हैं। रेगिस्तान में अवैध रूप से बिक रही ड्रग्स पाकिस्तान सीमा से इस पार भारत की सीमा में आती है। तहलका एसआईटी की रिपोर्ट ः-

बॉलीवुड की हिट फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के शुरुआती दृश्य में पाकिस्तान से लाई गई ड्रग्स को पंजाब के खेतों में फेंकते हुए दिखाया गया है। इस फिल्म ने सीमावर्ती राज्य में मादक पदार्थों के खतरे की भयावहता को बखूबी दर्शाया है। लेकिन आज यह समस्या केवल पंजाब तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसके पड़ोसी राज्य और पाकिस्तान की सीमा से लगे राजस्थान में भी पनप चुकी है। राजस्थान के कस्बों और जिलों में गैर-कानूनी तरीके से ड्रग्स की अवैध बिक्री खामोशी से ड्रग्स तस्कर कर रहे हैं।

झुंझुनू जिले के अजीतगढ़ और मंडावा कस्बों में तहलका ने पाया कि वहां नशीले पदार्थ काफी आसानी से उपलब्ध हैं। अपनी जांच के दौरान हमारे पत्रकार ने पाया कि गांजा और अन्य नशीले पदार्थ खुलेआम बेचे जा रहे हैं और आपूर्तिकर्ता, बिचौलिए और यहां तक कि स्थानीय लोग भी इस फलते-फूलते व्यापार से वाकिफ हैं।

‘मैं रोजाना तीन-चार बार गांजा का सेवन करता हूं। मैं हर बीस दिन या महीने में एक बार एक स्थानीय लड़के से गांजा खरीदता हूं। मैंने आपूर्तिकर्ता से 250 ग्राम गांजा खरीदा, जिसने दावा किया कि गांजा मणिपुर से है।’ -यह बात ड्रग तस्कर गोपाल सैनी ने राजस्थान में तहलका के गुप्त पत्रकार से कही।

‘मैं राजस्थान में आपके 250 लोगों के दल के लिए गांजा और अफीम दोनों की आपूर्ति करूंगा। यदि आप 2 किलो गांजा और 2 किलो अफीम लेते हैं, तो कुल लागत 5 लाख रुपए होगी। इसके लिए आपको मुझे कम से कम 4 लाख रुपए का भुगतान पहले करना होगा।’ -गोपाल ने तहलका रिपोर्टर को बताया।

‘मैं आपको जो अफीम दूंगा वह पाकिस्तान से है। इसे पाकिस्तान से तस्करी करके भारत लाया जाता है और फिर जैसलमेर और जोधपुर में पहुंचाया जाता है।’ -गोपाल ने तहलका रिपोर्टर से बात करते हुए कहा।

‘फोन पर मुझसे बात करते समय सांकेतिक शब्दों का प्रयोग करें, जैसे- गांजा के लिए लकड़ी और अफीम के लिए चाय की पत्तियां। और कृपया ध्यान रखें कि मुझे किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।’ -गोपाल ने तहलका रिपोर्टर को समझाया।

‘मैं आपके लिए ड्रग पेडलर से गांजा ला सकता हूं। लेकिन मैं तुम्हें अपने साथ वहां नहीं ले जा सकता, वरना फेरी वाला शक कर लेगा और शायद मुझे गांजा न दे।’ -राजस्थान के एक रिसॉर्ट में काम करने वाले मोहित कुमार ने तहलका रिपोर्टर से कहा।

‘मेरे रिसॉर्ट में आने वाले कुछ मेहमान और अपनी टैक्सियों में विदेशियों को ले जाने वाले और हमारे रिसॉर्ट में ठहरने वाले ड्राइवर गांजा मांगते हैं। रिसॉर्ट के कर्मचारी मुझसे उनके लिए गांजा लाने को कहते हैं। मुझे रिसॉर्ट तक गांजा लाने में आधा घंटा लगता है। कई बार मेहमानों की मांग पर मैं उनके लिए गांजा लेकर आया हूं। 25 ग्राम गांजे की कीमत 450 रुपए है।’ -मोहित ने तहलका रिपोर्टर को बताया।

‘अगर तुमने आज दोपहर में मुझसे गांजा मांगा होता, तो मैं अब तक तुम्हारे लिए उसका इंतजाम कर चुका होता। अब मुद्दा यह है कि गांजा लाने वाला व्यक्ति एक शादी में शामिल होने गया है। अगली बार जब आप आएं, तो मुझे पहले से सूचित कर दें, मैं आपके लिए गांजे का इंतजाम कर दूंगा।’ -राजस्थान के एक रिसॉर्ट में बार मैनेजर पूरन सिंह ने तहलका रिपोर्टर से कहा।

‘आपको जितना चाहें, उतना गांजा मिलेगा। राजस्थान के इस कस्बे में गांजा आसानी से उपलब्ध है। बस जाइए और आपको सड़क किनारे बैठे लोग गांजे का आनंद लेते हुए दिखेंगे। अगर आप उनसे मांगेंगे, तो वे आपको दे देंगे।’ -राजस्थान के एक कस्बे में ऊंट गाड़ी के मालिक गोपाल सिंह ने कहा।

‘जब फिल्म सितारे राजस्थान के इस शहर में शूटिंग के लिए आते हैं, तो वे ड्रग्स मांगते हैं। लेकिन वे सीधे तौर पर नहीं पूछते, उनके कर्मचारी उनकी ओर से पूछते हैं। चूंकि हम उनके लिए अन्य चीजों का इंतजाम करते हैं, इसलिए हम उनके लिए ड्रग्स का भी इंतजाम करते हैं।’ -राजस्थान के एक कस्बे में वरिष्ठ टूर गाइड संदीप सिंह ने तहलका रिपोर्टर से कहा।

उपरोक्त अंशों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्थान के अजीतगढ़ और मण्डावा शहरों में अवैध नशीले पदार्थ कितनी आसानी से उपलब्ध हैं। अजीतगढ़ और मण्डावा की तो बात ही छोड़िए, जैसलमेर, जोधपुर, श्री गंगानगर, बाड़मेर और बीकानेर जैसे शहरों में भी नशीले पदार्थों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसा कहा जाता है कि राजस्थान की पूरी आबादी के 20 प्रतिशत से अधिक लोग मादक पदार्थों के सेवन में लिप्त हैं। परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में ‘उड़ता राजस्थान’ शब्द का प्रचलन हुआ है, जो फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ में दर्शाए गए मादक पदार्थों के संकट के साथ समानताएं दर्शाता है।

रेगिस्तानी राज्य राजस्थान ने पाकिस्तानी गिरोहों द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले नशीले पदार्थों के मुख्य प्रवेश बिंदु के रूप में पंजाब की जगह ले ली है, जो सीमा पार खेप भेजने के लिए ड्रोन का उपयोग करते हैं। ड्रोन सस्ते हैं और प्रत्येक की कीमत 10,000 रुपए से 15,000 रुपए तक है। ड्रग्स से भारी मुनाफा मिलता है। तस्करों के लिए कुछ ड्रोन खोना महज एक मामूली परिचालन लागत है। शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ की शुरुआत एक ऐसे दृश्य से होती है, जिसमें पाकिस्तान से ड्रग्स पंजाब के खेतों में गिराई जाती हुई दिखाई देती है। इस राज्य का उपयोग राजस्थान और हरियाणा जैसे अन्य राज्यों में ड्रग्स की आपूर्ति करने के लिए  मार्ग के रूप में भी किया जाता है। वर्तमान में पाकिस्तान से राजस्थान में सीमावर्ती कस्बों के माध्यम से आने वाली ड्रग्स की आपूर्ति पूरे राज्य में की जाती है।

तहलका रिपोर्टर ने देखा कि राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के झुंझुनू जिले के अजीतगढ़ और मण्डावा की सड़कों पर खुलेआम ड्रग्स बेची जा रही है। पड़ताल के दौरान तहलका रिपोर्टर की मुलाकात मण्डावा में गोपाल सैनी से हुई, जो अपने नाम से सैनी होटल एंड रेस्टोरेंट चलाते हैं। सूत्र के संकेतानुसार, तहलका रिपोर्टर ने गोपाल सैनी से संपर्क किया और उनसे अवैध ड्रग्स की मांग की।

क्योंकि तहलका के रिपोर्टर उसके लिए अजनबी थे, गोपाल ने शुरू में हिचकिचाहट के बाद स्वीकार किया कि वह अपने रेस्तरां से गांजा बेचता है। उसने कहा कि वह खुद स्थानीय आपूर्तिकर्ता से गांजा खरीदकर दिन में तीन-चार बार उसका सेवन करता है। सैनी ने कहा कि वह अपने लिए हर बीस दिन में या महीने में एक बार 250 ग्राम गांजा खरीदता है। सैनी के अनुसार, गांजे का अवैध सप्लायर उसे मणिपुर से गांजा बेचता है। तहलका रिपोर्टर के साथ हुई इस बातचीत में गोपाल सैनी ने गांजे के सेवन के बारे में खुलकर बात की।

रिपोर्टर : अच्छा, आप खुद पीते हो गांजा?

गोपाल :  हां।

रिपोर्टर : ये राजस्थानी गांजा है क्या?

गोपाल : ये हमको मालूम नहीं, हमारे पास मणिपुरी बोल के आता है।

रिपोर्टर : आप कितना लेते हो?

गोपाल : मैं ज्यादा नहीं लेता, सिर्फ पाओ।

रिपोर्टर : कितना लेते हो आप… 250 ग्राम?

गोपाल : हां।

रिपोर्टर : रोज लेते हो?

गोपाल : रोज नहीं, महीना-20 दिन में एक बार।

रिपोर्टर : तो वो लोकल यहीं का रहने वाला है बंदा?

गोपाल : यहां का नहीं, आस-पास का है।

रिपोर्टर : उसके पास कहीं और से आती होगी?

गोपाल : हां।

रिपोर्टर : मणिपुर का बोलकर दे जाता है?

गोपाल : जैसे अलग-अलग बोलकर दे जाता है… मणिपुर का, उड़ीसा का, अलग-अलग आते हैं।

रिपोर्टर : नशा होता है इस वाले गांजे से?

गोपाल : देख लेना आप पीकर टेस्ट कर लेना।

रिपोर्टर सिगरेट में डालकर पीते हो… कैसे पीते हो?

गोपाल : हम तो चिलम में डालकर पीते हैं।

रिपोर्टर : डेली पीते हो, या कभी कभार?

गोपाल : दिन में 3-4 बार पीते हैं हम लोग।

रिपोर्टर : डेली?

नीचे दी गई बातचीत में एक ग्राहक बनकर गोपाल से मिले तहलका के रिपोर्टर ने उससे मण्डावा में होने वाली एक काल्पनिक पार्टी के बारे में बताते हुए कहा कि उस पार्टी में 200-250 लोगों के इकट्ठा होने की उम्मीद है। रिपोर्टर ने गोपाल से पूछा कि क्या वह उन्हें बड़ी मात्रा में गांजा उपलब्ध करा सकता है? गोपाल बिना किसी झिझक के जवाब दिया कि उसका एक आपूर्तिकर्ता है और वह आवश्यकतानुसार मात्रा की व्यवस्था कर सकता है। वह यह भी कहता है कि पहले से सूचित करने पर 4-5 किलो भी उपलब्ध कराया जा सकता है। वह अपने पास उपलब्ध गांजे की कीमत का भी जिक्र करता है।

रिपोर्टर : अच्छा, सुनो मेरी बात, हमारी एक पार्टी है 26-27 तारीख में यहीं मण्डावा, राजस्थान में, तो हमें चाहिए गांजा बड़ी मात्रा में।

गोपाल : कितना चाहिए?

रिपोर्टर : कितना दिलवा सकते हो?

गोपाल : कितना, फिर भी?

रिपोर्टर : 200-250 लोग हैं।

गोपाल : बता देना, दिलवा देंगे।

रिपोर्टर : है आपके पास बंदा? सप्लायर है?

गोपाल : है।

रिपोर्टर : कितने का मिल जाएगा, 200-250 लोगों के लिए, कितना होना चाहिए आपके हिसाब से?

गोपाल : जितना आप कहो… 1 केजी (किलो), 2 केजी, 5 केजी?

रिपोर्टर : 1 केजी, 2 केजी, 3 केजी?

गोपाल : जितना आपको चाहिए उतना बता देना, उसी हिसाब से मंगवा दूंगा।

रिपोर्टर : 4-5 किलो भी मिल जाएगा?

गोपाल : मिल जाएगा।

रिपोर्टर : क्या रेट होगा?

गोपाल : देखो, ये है मेरे पास 250 रुपए का 10 ग्राम।

जब हमने गोपाल से उसका फोन नंबर पूछा, तो उसने शुरू में इसे हमारे साथ साझा करने में हिचकिचाहट दिखाई। हालांकि बाद में जब वह थोड़ा आश्वस्त हुआ कि हम मण्डावा के एक रिसॉर्ट में होने वाली आगामी पार्टी के लिए अवैध ड्रग्स की तलाश में आए ग्राहक हैं, तो वह मान गया और उसने हमें अपना नंबर दे दिया। गोपाल ने हमें यह भी बताया कि हाल ही में मण्डावा में भी इसी तरह की एक पार्टी आयोजित की गई थी।

रिपोर्टर : तो आप मुझे अपना नंबर दे दो… मुझे चाहिए 200-250 लोगों के लिए।

गोपाल : हम नंबर नहीं दे सकते। ये मेरी दुकान है, यहां मुझसे बात करो।

रिपोर्टर : लेकिन हम तो चले जाएंगे, हम तो 26-27 को आएंगे, तो मैं पता कैसे करूंगा आपसे?

गोपाल : नहीं भैया डर लगता है।

रिपोर्टर : व्हाट्सएप पर बात कर लेंगे, किसी और तरीके से?

गोपाल : चलो ठीक है।

रिपोर्टर : हमें चाहिए 200-250 लोगों के लिए, पार्टी है।

गोपाल : अच्छा, पीछे बेर भी पार्टी होकर गई थी।

रिपोर्टर : कहां?

गोपाल : डेजर्ट में। आपकी कहां है, मेरे को मालूम नहीं है?

रिपोर्टर : हमारी भी वहीं है डेजर्ट में।

गोपाल : 5-7 दिन पहले भी होकर गई थी यहां से, 15 दिन पहले मान लो आप।

रिपोर्टर : अच्छा, 1-2 फरवरी को?

गोपाल : हां।

जैसे-जैसे हमने और पूछताछ की, गोपाल ने कुबूल किया कि गांजे के अलावा वह हमारी पार्टी के लिए अफीम भी सप्लाई कर सकता है। उसने आगे कहा कि अफीम को पाकिस्तान से तस्करी करके भारत लाया गया है और यह जोधपुर-जैसलमेर की तरफ से आई है। गोपाल ने हमें 10 ग्राम अफीम का 2,500 रुपए भाव बताया।

रिपोर्टर : सिर्फ गांजा है, और कुछ नहीं है… जैसे हेरोइन, चरस?

गोपाल : नहीं, वो नहीं है। अफीम मिल जाएगी…।

रिपोर्टर : अफीम कहां से आती है?

गोपाल : अफीम आती है ये जोधपुर साइड से।

रिपोर्टर : पाकिस्तान बॉर्डर से आती होगी जैसलमेर, जोधपुर में?

गोपाल : हां।

रिपोर्टर : अफीम का क्या रेट है?

गोपाल : 10 ग्राम का 2,500 रुपए है।

रिपोर्टर : प्योर होगी, मिलावट तो नहीं?

गोपाल : बढ़िया चीज आएगी।

जब गोपाल ने हमें बताया कि वह अफीम की आपूर्ति भी कर सकता है, तो हमने अपनी काल्पनिक पार्टी के लिए उसे एक फर्जी ऑर्डर दे दिया। हमने गोपाल से मण्डावा में 200-250 मेहमानों की एक पार्टी के लिए 2 किलो गांजा और 2 किलो अफीम उपलब्ध कराने के लिए कहा। गोपाल सहमत हो गया और उसने हमें दोनों पदार्थों की संयुक्त दर बताई। उसने कहा कि हमें दोनों के लिए 55 लाख रुपए देने होंगे।

रिपोर्टर : आप एक काम करो, हमें 2-2 किलो करवा दो, 2 किलो गांजा और 2 किलो अफीम।

गोपाल : 2 किलो अफीम…. पैसे बहुत हो जाएंगे?

रिपोर्टर : वो तो दे देंगे हम। पैसे कितने हो जाएंगे?

गोपाल : 10 ग्राम के 2,500 हो गए, तो लाख रुपीज हो जाएंगे।

रिपोर्टर : हां, वो दे देंगे।

गोपाल : दोनों के मिलाकर 5.50 लाख रुपए हो जाएंगे।

रिपोर्टर : अफीम और गांजा दोनों के?

गोपाल : हां, 2 किलो गांजा आ जाएगा और 2 किलो अफीम।

रिपोर्टर : ठीक है, आप करवा दो।

इसके बाद गोपाल ने हमें सौदे से संबंधित दो कोड वर्ड दिए, जिनका इस्तेमाल फोन पर बात करते समय करने को उसने कहा। एक पेशेवर होने के नाते वह यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरत रहा था कि अवैध ड्रग्स की आपूर्ति करने के लिए उसे किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उसने हमें गांजे के लिए ‘लकड़ी’ और अफीम के लिए ‘चाय पत्ती’ का कोड वर्ड इस्तेमाल करने को कहा। गोपाल ने यह भी बताया कि हमें डिलीवरी से एक घंटा पहले उसे सूचना देनी होगी, उसका आदमी सामान पहुंचा देगा। हमने गोपाल को यह भी कहा कि जब तक हम उसे न कहें, तब तक वह इन चीजों का इंतजाम न करे।

गोपाल : आप लकड़ी के नाम से बोल देना… इसके लिए तो लकड़ी।

रिपोर्टर : गांजा के लिए?

गोपाल : और उसके लिए चाय बोल देना।

रिपोर्टर : अफीम के लिए चाय?

गोपाल : चाय पत्ती बोल देना।

रिपोर्टर : ये बताओ, दोनों लेने हमें आना पड़ेगा या आप रिजॉर्ट पर पहुंचा दोगे?

गोपाल : पहुंचा देंगे।

रिपोर्टर : डिजर्ट वाले में।

गोपाल : आप आ जाना डेजर्ट में, क्या दिक्कत है, आप जभी बोलोगे तभी लड़का एक घंटा आधा घंटा पहले देकर जाएगा, 1 घंटे में आप आकर ले जाना।

रिपोर्टर : मैं जब फोन करूं, तब ही मंगवाना, उसके पहले मत मंगवाना।

गोपाल ने शुरू में हमसे अवैध ड्रग्स के लिए पूरे 5 लाख रुपए अग्रिम रूप से मांगे। लेकिन हमने यह कहते हुए पूरी रकम पहले देने से इनकार कर दिया कि हमें अपने पैसे की गारंटी भी चाहिए। इसके बाद गोपाल ने राशि घटाकर 4 लाख रुपए कर दी और इस बात पर जोर दिया कि ये पैसे भी पहले ही यानी अभी देने होंगे। गोपाल ने कहा कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि आप मेरी संपत्ति (रेस्टोरेंट) पर खड़े हो और मैं पैसे लेकर गायब नहीं हो जाऊ॔गा। गोपाल ने हमसे यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि हमें ड्रग्स की आपूर्ति करने के कारण उसे किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

गोपाल : पेमेंट पहले करना पड़ेगा आपको।

रिपोर्टर : पेमेंट कितना करना पड़ेगा?

गोपाल : 5 लाख रुपए तो करना पड़ेगा।

रिपोर्टर :5 लाख…एडवांस?

गोपाल : 4 कर देना।

रिपोर्टर : 4 लाख कैश, पैसे का नुकसान न हो जाए?

गोपाल : मैं बैठा हूं ना यहां पे, टेंशन क्यूं ले रहे हो? ये मेरी दुकान है।

रिपोर्टर : ऐसा न हो हम पैसे दें, वो चले जाएं?

गोपाल : आप पैसे की कोई टेंशन मत लो, बस आप उसका ध्यान रखना, वो कहीं गड़बड़ हो जाए।

रिपोर्टर : कौन सी गड़बड़?

गोपाल : वैसे तो ये मेरी प्रॉपर्टी है, पैसे की टेंशन मत लेना।

राजस्थान से लौटने के बाद गोपाल सैनी लगातार हमें फोन करता रहा और पूछता रहा कि मण्डावा में हमारी पार्टी कब होने वाली है, ताकि वह ड्रग्स की आपूर्ति कर सके। हमने उसे बताया कि इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। क्योंकि हमारी पार्टी फर्जी थी, इसलिए हमने गोपाल सैनी से कोई नशीला पदार्थ नहीं लिया। इस सौदे का मकसद सिर्फ उसे बेनकाब करना था।

गोपाल सैनी एक ड्रग पेडलर है, जिससे तहलका रिपोर्टर की मुलाकात मण्डावा में हुई, जहां वह कथित तौर पर अपने रेस्तरां से अवैध ड्रग्स बेचता है। हमें यह जानकर भी गहरा सदमा लगा कि अजीतगढ़ के एक रिसॉर्ट का एक कर्मचारी भी ड्रग्स बेचने में शामिल मिला, जहां तहलका के रिपोर्टर ठहरे हुए थे। बिहार के एक हेरिटेज होटल के कर्मचारी मोहित कुमार ने हमारे रिपोर्टर को बताया कि मण्डावा की सड़कों पर गांजा आसानी से उपलब्ध है और वह उस जगह को जानता है, जहां यह बेचा जाता है। उसने कहा कि आपको केवल ऑर्डर देना होगा और वह इसे पास के गांव से ले आएगा।

नीचे दी गई बातचीत में रिपोर्टर ने मोहित से उस इलाके में ड्रग्स की उपलब्धता के बारे में पूछा। मोहित ने कहा कि वहां सिर्फ गांजा ही आसानी से उपलब्ध है। जब उससे पूछा गया कि ड्रग्स कैसे प्राप्त की जा सकती है, तो उन्होंने बताया कि इसे पास के एक गांव से लाना पड़ता है। मोहित यह भी कहता है कि वह उस जगह को जानता है, जहां से इसे प्राप्त किया जा सकता है। वह संकेत देता है कि उसने स्वयं उस स्थान को देखा है।

रिपोर्टर : क्या-क्या मिलता है?

मोहित : गांजा मिलती है।

रिपोर्टर : गांजा मिलता है, और?

मोहित : बस गांजा मिलता है।

रिपोर्टर : तो कैसे मिलेगा किसी को चाहिए हो तो?

मोहित : लाना पड़ेगा जाकर बाहर गांव में।

रिपोर्टर : देखी है तूने जगह?

मोहित : हां।

जब हमने इस बात पर जोर दिया कि हम मोहित के साथ ड्रग पेडलर से गांजा लाने जाएंगे, तो उसने इनकार कर दिया। मोहित ने बताया कि वह फेरीवाला सिर्फ उसे ही जानता है और उसे गांजा तभी देता है, जब वह अकेला जाता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर वह हमें साथ ले गया, तो ड्रग्स बेचने वाले को शक हो जाएगा और वह ड्रग देने से इनकार कर देगा।

रिपोर्टर : तो चल।

मोहित : पैसे देंगे तो हम ले आएंगे जाकर।

रिपोर्टर : हमें मंगवाना नहीं, उससे बात करनी है।

मोहित : नहीं सर, भड़क जाएगा वो।

रिपोर्टर : क्यूं?

मोहित : डर जाएगा वो।

रिपोर्टर : डरने की क्या बात है?

रिपोर्टर (आगे) : अच्छा, तू लेकर नहीं जाएगा, हमें ला देगा।?

मोहित : शक करेगा ना सर! ये दूसरे टाइप का एरिया है, इसलिए शक करेगा।

रिपोर्टर : हम दूसरे टाइप के दिख रहे हैं?

मोहित : हां इसलिए देगा ही नहीं आपको।

रिपोर्टर : तेरे को दे देंगे?

मोहित : हां।

मोहित ने खुलासा किया कि यह पहली बार नहीं होगा, वह कई बार होटल में गांजा लेकर आया है। इससे पहले भी कई मौकों पर वह होटल के मेहमानों और विदेशी पर्यटकों के साथ आने वाले ड्राइवरों के लिए गांजा ला चुका है। मोहित ने यह भी बताया कि कुछ मेहमानों सहित अन्य लोग भी इसी तरह के अनुरोध करते हैं। इसके बाद वह इलाके में मिलने वाले गांजे की कीमत का जिक्र करते हुए कहता है कि 25 ग्राम गांजे की कीमत 450 रुपए है।

रिपोर्टर : तू लाया है पहले?

मोहित : हां, ड्राइवर्स को लाया हूं।

रिपोर्टर : कौन से ड्राइवर्स?

मोहित : ये जो आते हैं अंग्रेज का, कोई-कोई मांगता है, तो हम दिला देते हैं।

रिपोर्टर : ड्राइवर्स मांगते हैं, या और लोग भी?

मोहित : हां और भी मांगते हैं।

रिपोर्टर : गेस्ट लोग भी?

रिपोर्टर (आगे) : क्या रेट है यहां पर?

मोहित : 450 रुपए का 25 ग्राम।

रिपोर्टर : कितना होता है?

मोहित : 25 ग्राम इतना होता है।

हमने पहले दिन मोहित से बात की थी, लेकिन गांजे का ऑर्डर नहीं दिया था। अगले दिन उसने हमें फोन किया और कहा कि वह आधे घंटे में ड्रग तस्कर के पास जाएगा। अगर हमें गांजा चाहिए, तो हमें उसे 450 रुपए दें। गुणवत्ता के बारे में पूछे जाने पर मोहित ने कहा कि यह अच्छी होगी और हमें आश्वासन दिया कि गांजा विक्रेता से उस होटल तक लाने के दौरान उसे कुछ भी नहीं होगा, जहां हम ठहरे हुए थे।

रिपोर्टर : तू कब फ्री होगा?

मोहित : चले जाएंगे आधे घंटे में।

रिपोर्टर : मुझे कितने पैसे देने हैं तुझे?

मोहित : 450 रुपए का 25 ग्राम।

रिपोर्टर : ठीक है और कुछ नहीं मिलेगा?

मोहित : नहीं।

रिपोर्टर : तू ला देगा, गांजा ठीक होगा?

मोहित : हां।

रिपोर्टर : पहले लाया है…. अच्छा तो होगा?

मोहित : हां, पीने में भी अच्छा है।

रिपोर्टर : नशा है?

मोहित : हां।

रिपोर्टर : तुझे लैने में दिक्कत तो नहीं होगी?

मोहित : आधा घंटा लगेगा… मैं लाकर दे दूंगा।

रिपोर्टर : कितने पैसे दे दूं?

मोहित : 450 रुपए।

हमने मोहित से कहा कि वह होटल में किसी को भी यह न बताए कि हम गांजा मांग रहे हैं। इसके जवाब में मोहित ने कहा कि होटल में सभी लोग पहले से ही जानते हैं कि वही मेहमानों के लिए मांग पर गांजा लाता है और वह उस तस्कर को भी जानता है। वह कहता है कि जब भी कोई पूछता है, वह उसके लिए ले आता है।

रिपोर्टर : यहां बताना नहीं किसी को ….किसी को पता है?

मोहित : स्टाफ को पता है।

रिपोर्टर : क्या?

मोहित : स्टाफ को पता है मैं लाकर देता हूं।

रिपोर्टर : अच्छा, कोई मांगता है तो तू लाकर दे देता है?

मोहित : हम।

रिपोर्टर : तू कितनी बार ला चुका है?

मोहित : 4-5 बार ला दिए हैं।

रिपोर्टर : कोई दिक्कत तो नहीं हुई होटल में लाने में?

मोहित : न न।

हमने होटल से गांजा ऑर्डर किए बिना ही प्रस्थान कर दिया, क्योंकि हमारा उद्देश्य गांजा खरीदना नहीं, बल्कि इस रैकेट की जांच करना था। मोहित 25 ग्राम गांजे के लिए 450 रुपये मांगता रहा। हमने उसे 450 रुपए दिए, लेकिन गांजे के लिए नहीं, बल्कि टिप के तौर पर।

अजीतगढ़ के उसी होटल में मोहित से मिलने से पहले हमने बार मैनेजर पूरन सिंह से हमारे लिए गांजा का इंतजाम करने को कहा। हमने रात करीब 9:30 बजे अनुरोध किया। पूरन ने कहा कि पास के एक गांव में गांजा उपलब्ध है, लेकिन उसने कहा कि चूंकि आपने देर रात पूछा है, इसलिए व्यवस्था करना मुश्किल होगा। उसने कहा कि अगर हमने दिन में पूछा होता, तो वह इंतजाम कर देता। फिर भी पूरन ने कहा कि वह कोशिश करेगा और हमें बता देगा। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह दिन का काम खत्म करने के बाद गांजे का सेवन करता है।

रिपोर्टर : यहां कैसे मिलेगा मण्डावा में?

पूरन : आप दिन में बोलते…. चलो अभी भी पूछता हूं।

रिपोर्टर : दिन में कहां से मंगवाते?

पूरन : कहीं से भी।

रिपोर्टर : यहां मण्डावा में है?

पूरन : हां, इसी गांव में है।

रिपोर्टर : अजीतगढ़ में?

पूरन : हां।

रिपोर्टर : मंगवाया है पहले कभी?

पूरन : पीते हैं हम काम खत्म करने के बाद।

कुछ समय बाद पूरन ने हमें बताया कि होटल में गांजा लाने वाला व्यक्ति एक शादी के लिए शहर से बाहर गया हुआ है और दो-तीन दिनों में वापस आ जाएगा। उसने कहा कि अगली बार जब हम अजीतगढ़ के होटल में ठहरने आएंगे, तो वह हमारे लिए गांजे का इंतजाम कर देगा। पूरन ने रिपोर्टर से अपना फोन नंबर भी साझा किया और उनसे अगली बार पहले से कॉल करने का अनुरोध किया। उसने आश्वासन दिया कि इसके बाद व्यवस्था की जा सकती है।

रिपोर्टर : अच्छा, ये बता कब मिल जाएगी वो, कब आ जाएगा तेरा बंदा लौट के?

पूरन : वो गया है शादी में, मैंने उसको फोन किया है।

रिपोर्टर : रात को आ जाएगा?

पूरन : न न… उसके ननिहाल में शादी है… वो आएगा 2-3 दिन में लौटकर।

रिपोर्टर : आगे कभी आऊं, तो मिल जाएगी, मैं भांग की बात कर रहा हूं?

पूरन : हां हां।

रिपोर्टर : आगे मिल जाएगी, आगर आऊं तो? क्या रेट है?

पूरन : वो तो पूछना पड़ेगा।

रिपोर्टर : क्या नंबर है।

पूरन : 772XXXXX……

रिपोर्टर : हां, भांग नहीं, गांजा मंगवाना है।

पूरन : हां।

रिपोर्टर : अगली बार मैं आऊं, तो दिल्ली से फोन कर दूंगा, मंगा दियो।

पूरन : हां हां।

रिपोर्टर : ठीक है।

मण्डावा और अजीतगढ़ में गांजा कितनी आसानी से उपलब्ध है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब हमने एक ऊंट गाड़ी मालिक गोपाल सिंह से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने हमें बताया कि मंडावा में गांजा किसी भी मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में एक शादी में शामिल होने आए एक ड्राइवर ने वहां से गांजा लाने में कामयाबी हासिल की। गोपाल ने हमें उस जगह तक भी पहुंचाया, जहां लोग बैठकर गांजा पीते हैं और कहा कि हम उनसे गांजा ले सकते हैं।

रिपोर्टर : गांजा कहां मिलेगा?

गोपाल : गांजा मण्डावा में।

रिपोर्टर : पक्का?

गोपाल : अरे खूब, जितना चाहो।

रिपोर्टर : इतनी गारंटी से कैसे कह रहे हो?

गोपाल : लोग पीते हैं। मैं तो नहीं पीता, मैं बता दूंगा। वही, वहीं जो जगह लोग पीते हैं, आप चले जाना।

रिपोर्टर : वो तो अपने पीने के लिए लोग लाते हैं, बेचने के लिए थोड़ी ही?

गोपाल : कल यहां शादी में एक ड्राइवर यहां से गया, बोला मैं जयपुर से आया हूं, वो गया और 500 में लेकर आ गया।

रिपोर्टर : उसी से?

रिपोर्टर : तो आराम से मिल जाएगा, कोई दिक्कत नहीं है?

गोपाल : हां, आप वहां किसी आदमी से भी पूछोगे, वो बता देगा ‘भाई यहां मिलती है।

रिपोर्टर : हम तो बाहर के हैं, हमें कैसे देगा?

गोपाल : आप पूछ तो सकते हो, ‘भाई, दारू कहां मिलेगी?’
रिपोर्टर : पर गांजा कोई खुलेआम थोड़ी बेचता है?

गोपाल : बेचने वाला बेचते हैं।

अब मण्डावा में हमारी मुलाकात एक वरिष्ठ टूर गाइड से हुई, जिसने दावा किया कि वहां शूटिंग के लिए आने वाले फिल्म स्टार भी कभी-कभी अवैध ड्रग्स मांगते हैं। संदीप के अनुसार, वे सीधे तौर पर नहीं पूछते; उनके कर्मचारी उनकी ओर से अनुरोध करते हैं। संदीप ने बताया कि चूंकि वह मण्डावा में फिल्म शूटिंग की व्यवस्था संभालते हैं, इसलिए ड्रग्स का इंतजाम भी उन्हें ही करना पड़ता है।

रिपोर्टर : मैं देख रहा था यहां गांजा भी बिक रहा था, अजीतगढ़-मण्डावा में?

संदीप : हां, पीने वाले हैं वो सब जगह होते हैं, चोरी-चोरी से मिलता है, इल्लीगल है सब जगह, मिलता है पर खेती नहीं होती यहां।

रिपोर्टर : फिल्म स्टार्स तो लेते होंगे?

संदीप : हां।

रिपोर्टर : क्या…. गांजा या अफीम?

संदीप : गांजा पीने वाले गांजा पीते हैं, डिपेंड करता है पॉकेट कितना अफोर्ड करती है।

रिपोर्टर : फिल्म स्टार्स की तो पॉकेट अफोर्ड करती होगी?

संदीप : फिल्म स्टार्स डायरेक्ट नहीं मांगते, उनके नीचे वाले होते हैं, वो करते हैं सब अरेंज। बॉम्बे से लोग आते हैं, सबकी अलग-अलग डिमांड होती है।

रिपोर्टर : तो आप कैसे प्रोवाइड करते हो?

संदीप : हमारा तो काम ही है बताना, सब चीजें कहते ही हैं हम लोग।

तहलका की पड़ताल अजीतगढ़ और मण्डावा में की गई, जहां अवैध ड्रग्स आसानी से उपलब्ध हैं। इस पड़ताल का उद्देश्य क्षेत्र में सक्रिय ड्रग गिरोहों का पर्दाफाश करना है। राजस्थान कृत्रिम दवाओं, विशेष रूप से मेफेड्रोन (एमडी) के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है, जहां सिरोही, बाड़मेर, जालोर और श्रीगंगानगर जैसे जिलों में कई गुप्त प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया गया है। मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले लोग पाकिस्तान से उनकी तस्करी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल करते हैं।

पंजाब और पाकिस्तान दोनों से सटी सीमा साझा करने वाले राजस्थान में मादक पदार्थों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यह रेगिस्तानी राज्य तेजी से पाकिस्तान स्थित गिरोहों द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले नशीले पदार्थों के लिए एक प्रमुख प्रवेश बिंदु के रूप में उभर रहा है और पंजाब की जगह ले रहा है। सीमा पार से ड्रग्स लाने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। छोटे पर्यटन शहरों से मिले हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि यह समस्या सीमावर्ती जिलों और बड़े शहरों से परे चुपचाप फैल रही है। उड़ता पंजाब के बाद क्या अब उड़ता राजस्थान है?

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