नई दिल्ली: ईरान से जुड़े तनाव और वैश्विक हालात के बीच अब China की समुद्री रणनीति ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक बड़े स्तर पर अंडरवॉटर सर्वे और निगरानी अभियान चला रहा है। इसमें कई रिसर्च जहाज और Submarines शामिल हैं, जो समुद्र की गहराई का बारीकी से डेटा जुटा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ वैज्ञानिक रिसर्च नहीं, बल्कि एक बड़ी सैन्य रणनीति का हिस्सा है। समुद्र के भीतर की भौगोलिक जानकारी, तापमान, ध्वनि तरंगों का व्यवहार—ये सब चीजें Submarine युद्ध में बहुत अहम होती हैं। ऐसे में चीन इस डेटा के जरिए अपनी सबमरीन को बेहतर तरीके से छिपाने और दुश्मन पर सटीक हमला करने की तैयारी कर रहा है।

चीन Indian Ocean से लेकर Pacific Ocean तक बड़े स्तर पर अंडरवॉटर सर्वे और निगरानी अभियान चला रहा है। (फोटो: Reuters)
इस पूरे घटनाक्रम से United States की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि गुआम और हवाई जैसे अहम इलाकों के आसपास भी चीनी गतिविधियां बढ़ी हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि चीन अब सिर्फ अपने इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी समुद्री पकड़ मजबूत करना चाहता है।
इसी बीच, Donald Trump भी ईरान को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बात कर रहे हैं। माना जा रहा है कि बदलते हालात और चीन की बढ़ती मौजूदगी के चलते अमेरिका अपनी रणनीति पर दोबारा विचार कर रहा है।
चीन का यह अभियान उसकी “सिविल-मिलिट्री फ्यूजन” नीति का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें वैज्ञानिक रिसर्च को सीधे सैन्य ताकत से जोड़ा जाता है। इससे भविष्य में समुद्र के भीतर होने वाले युद्ध में उसे बढ़त मिल सकती है।
अब जंग सिर्फ जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रही। आने वाले समय में समंदर के अंदर भी बड़ी ताकतों के बीच मुकाबला और तेज होने वाला है, और चीन की ये चाल उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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