नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है। इस फैसले के बाद साफ हो गया कि पार्टी और राघव के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था।
दरअसल, पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा के काम करने के तरीके को लेकर पार्टी के अंदर असहमति की खबरें सामने आ रही थीं। पार्टी का आरोप है कि राघव चड्ढा संगठन के अहम मुद्दों पर खुलकर नहीं बोल रहे थे, खासकर भाजपा और प्रधानमंत्री पर उनके बयान कम नजर आ रहे थे।
वहीं दूसरी ओर, राघव चड्ढा का कहना है कि वह संसद में आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे। उन्होंने मोबाइल डेटा, एयरपोर्ट पर महंगाई, गिग वर्कर्स की परेशानियां, पितृत्व अवकाश और पेपर लीक जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। इन विषयों को लेकर उनके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए और लोगों का समर्थन मिला।
लेकिन पार्टी को उनका यह तरीका पसंद नहीं आया। आम आदमी पार्टी का मानना है कि राघव पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे और जरूरी राजनीतिक मुद्दों पर चुप्पी साध रहे थे। खासकर जब पार्टी के बड़े नेता कानूनी मामलों में घिरे थे, उस दौरान राघव की चुप्पी को लेकर सवाल उठे।
पार्टी के कुछ नेताओं ने यह तक कहा कि राघव ‘सॉफ्ट इश्यू’ पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं और बड़े राजनीतिक मुद्दों से दूरी बना रहे हैं। वहीं राघव ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि आम आदमी के मुद्दे उठाना कोई गलती नहीं है और उनकी चुप्पी को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद को उजागर कर दिया है। एक तरफ पार्टी अनुशासन और लाइन की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ राघव खुद को आम लोगों की आवाज के रूप में पेश कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि यह सियासी खींचतान आगे क्या मोड़ लेती है और क्या राघव चड्ढा पार्टी के साथ बने रहते हैं या कोई नया रास्ता चुनते हैं।
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