नई दिल्ली: देश में परिसीमन को लेकर जारी चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ करने की कोशिश की है। सरकार के मुताबिक, आने वाले समय में लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इससे किसी भी राज्य का हिस्सा कम नहीं होगा। यानी जो अनुपात आज है, वही आगे भी बनाए रखा जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा की सीटें करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर 850 के आसपास की जा सकती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि हर राज्य की सीटों में भी लगभग उसी अनुपात में बढ़ोतरी होगी। इस कदम का मकसद संसद में प्रतिनिधित्व को और मजबूत करना बताया जा रहा है।
दरअसल, परिसीमन को लेकर खासतौर पर दक्षिण भारत के राज्यों में चिंता जताई जा रही थी। तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के नेताओं को डर था कि अगर जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा हुआ, तो उनकी हिस्सेदारी कम हो सकती है। उनका तर्क था कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, उन्हें इसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
सरकार ने अब इन सभी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की है। साफ तौर पर कहा गया है कि परिसीमन का उद्देश्य किसी राज्य को फायदा या नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि लोकतंत्र को और ज्यादा प्रतिनिधित्व देना है। यानी सीटें बढ़ेंगी, लेकिन संतुलन वही रहेगा।
हालांकि, अंतिम फैसला परिसीमन आयोग के हाथ में होगा, जो नए सिरे से सीटों और क्षेत्रों का निर्धारण करेगा। लेकिन सरकार की तरफ से यह संकेत दिए गए हैं कि आयोग को भी मौजूदा अनुपात बनाए रखने का निर्देश दिया जाएगा।
यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब संसद के विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है। ऐसे में सरकार का यह बयान राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि परिसीमन से डरने की जरूरत नहीं है। राज्यों की राजनीतिक ताकत और हिस्सेदारी पहले जैसी ही बनी रहेगी, बस संसद में प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी।
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