तहलका डेस्क।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सियासी रणक्षेत्र में ‘अंतिम प्रहार’ की तैयारी अब पुनर्मतदान के जरिए पूरी की जा रही है। दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्रों में शनिवार सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लोकतंत्र की जीवंतता और सतर्कता का प्रमाण दे रही हैं। निर्वाचन आयोग की मुस्तैदी का आलम यह है कि पूर्वाह्न 11 बजे तक लगभग 37 प्रतिशत मतदान दर्ज किया जा चुका है, जो यह स्पष्ट करता है कि धांधली के आरोपों के बावजूद मतदाताओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।
विशेष रूप से, डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र—जो तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का गढ़ माना जाता है—वहां के कुछ केंद्रों पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतों ने चुनाव आयोग को कड़े फैसले लेने पर मजबूर किया। विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता की जमीनी जांच और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर 15 केंद्रों पर दोबारा वोटिंग का यह निर्णय न केवल निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास है, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच साख की लड़ाई भी है।
मगरा हाट पश्चिम में जहां टीएमसी के मोहम्मद शमीम अहमद मोल्ला और भाजपा के गौर सुंदर घोष के बीच कांटे की टक्कर है, वहीं डायमंड हार्बर में पन्ना लाल हलदर और दीपक कुमार हलदर के बीच का मुकाबला प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है। सुरक्षा के लिहाज से केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और लगातार जारी वेबकास्टिंग ने इन केंद्रों को किले में तब्दील कर दिया है। 29 अप्रैल के मतदान के दौरान उठी हिंसा और धांधली की गूंज को दबाने के लिए आयोग ने इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं। अब निगाहें चार मई के नतीजों पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि पुनर्मतदान का यह ‘सेकंड चांस’ बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ में सौंपता है। फाल्टा विधानसभा क्षेत्र पर आने वाला संभावित फैसला भी इस सियासी तस्वीर को और अधिक स्पष्ट करेगा।
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