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दिल्ली विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान 2026-27: क्या बदलेगा, क्यों जरूरी हुआ और कितना असर पड़ेगा? | Pavitra India

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रुखसार- तहलका

New Delhi — 29 September, 2026 —

दिल्ली की सर्दियों की हवा पर अब हर साल चलेगा एक तय प्लान

दिल्ली में सर्दी शुरू होते ही प्रदूषण का संकट गहराने लगता है। तापमान गिरने, हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के फैलाव (Pollutants Dispersion) में कमी के साथ पीएम2.5 (PM2.5) और पीएम10 (PM10) का स्तर बढ़ता है। इसी बार-बार सामने आने वाली समस्या को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अब अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग आदेश जारी करने के बजाय एक स्थायी शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण ढांचा (Winter Pollution Control Framework) तैयार किया है।

दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने 23 जून 2026 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत व्यापक निर्देश जारी किए, जिन्हें 1 जुलाई 2026 को दिल्ली राजपत्र में प्रकाशित किया गया। ये नियम हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू होंगे। यानी 2026-27 की सर्दियों से यह ढांचा पहली बार अपने स्थायी स्वरूप में लागू होगा।

क्या है विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान?

यह कोई सिर्फ एक “चार महीने का प्रदूषण अभियान” नहीं है। यह दिल्ली में सर्दियों के दौरान लागू होने वाले अलग-अलग प्रदूषण नियंत्रण उपायों को एक समेकित नियामक ढांचे (Consolidated Regulatory Framework) में लाने की कोशिश है।

इससे पहले पार्किंग प्रतिबंध, निर्माण प्रतिबंध, घर से काम (Work From Home), वाहन प्रतिबंध आदि कई बार ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) या अलग-अलग सरकारी आदेशों के जरिए लगाए जाते थे।

अब सरकार ने इन्हें पहले से तय कैलेंडर के साथ जोड़ दिया है, ताकि हर साल प्रदूषण बढ़ने का इंतजार करके आपातकालीन आदेश जारी करने की जरूरत कम हो। आधिकारिक अधिसूचना में पिछले तीन वर्षों के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए कहा गया है कि 1 नवंबर से 15 फरवरी के बीच दिल्ली की वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती है। इस अवधि में मध्यिका वायु गुणवत्ता सूचकांक (Median AQI) 312 से 342 और अधिकतम AQI 461 से 494 के बीच रहा।

यह प्लान किसने बनाया?

इस ढांचे को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (Government of National Capital Territory of Delhi) के पर्यावरण विभाग ने तैयार और अधिसूचित किया है।

यह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत जारी हुआ है। इसमें दिल्ली सरकार के पहले के प्रदूषण-नियंत्रण आदेशों को एक साथ जोड़ा गया है और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के साथ इसे समन्वित किया गया है।

2026 में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच प्रदूषण-नियंत्रण उपायों की समीक्षा भी हुई। मई 2026 में पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और अधिकारियों के साथ वायु-प्रदूषण कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए सड़क की धूल, यातायात प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) संक्रमण और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कार्यान्वयन तेज करने पर जोर दिया था।

आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

सबसे बड़ा कारण है दिल्ली में शीतकालीन प्रदूषण का बार-बार लौटना।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के शीतकालीन आंकड़ों में 1 नवंबर से 15 फरवरी के बीच AQI लगातार खराब श्रेणी में रहा। इसी आधार पर सरकार ने मौसमी हस्तक्षेप को स्थायी ढांचे में बदलने का फैसला किया।

और प्रदूषण सिर्फ दिल्ली के अंदर पैदा होने वाली समस्या नहीं है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा 2026 में विशेषज्ञ पैनल के स्रोत-विभाजन विश्लेषण (Source-Apportionment Analysis) में शीतकालीन PM2.5 के प्रमुख योगदानकर्ताओं में द्वितीयक कण 27%, परिवहन 23%, जैव ईंधन जलाना 20%, धूल 15% और उद्योग/ताप विद्युत लगभग 9% बताए गए हैं। ये प्रतिशत पूरे दिल्ली-एनसीआर वायुमंडलीय क्षेत्र की स्रोत-विभाजन जांच के संदर्भ में हैं, इसलिए इन्हें केवल दिल्ली के स्थानीय उत्सर्जन का सटीक विभाजन नहीं माना जाना चाहिए।

यही वजह है कि नए ढांचे में केवल गाड़ियों पर नहीं बल्कि परिवहन + धूल + निर्माण + कार्यालय + पार्किंग + कचरा जलाना + वाहन प्रमाणन जैसे कई क्षेत्रों पर एक साथ हस्तक्षेप किया गया है।

पिछले साल दिल्ली में प्रदूषण कितना था?

अगर कैलेंडर वर्ष 2025 की बात करें तो CAQM के मुताबिक दिल्ली ने 2018 के बाद, कोविड-प्रभावित 2020 को छोड़कर, अपना सबसे कम वार्षिक औसत PM10 और PM2.5 दर्ज किया।

CAQM के मुताबिक 2025 में दिल्ली में 79 दिन AQI 100 या उससे कम रहा और गंभीर/अति गंभीर (Severe/Severe+) श्रेणी वाले दिनों की संख्या 8 रही।

लेकिन वार्षिक औसत बेहतर होने का मतलब यह नहीं है कि शीतकालीन प्रदूषण खत्म हो गया था।

विंटर 2025-26 में स्थिति

विश्लेषण के मुताबिक 2025-26 सर्दियों में प्रदूषण दिसंबर तक ऊंचा बना रहा। नवंबर में औसत PM2.5 करीब 215 µg/m³ और दिसंबर में 213 µg/m³ था।

इस दौरान दिल्ली में 27 दिन GRAP चरण III और 14 दिन GRAP चरण IV लागू रहा। यानी मौसम के दौरान कुल 41 दिन सबसे कड़े GRAP प्रतिबंधों में रहे।

यह आंकड़ा बताता है कि वार्षिक औसत में सुधार के बावजूद शीतकालीन प्रदूषण अभी भी गंभीर समस्या बना हुआ है।

प्रदूषण से कितनी मौतें हुईं?

वैज्ञानिक अध्ययनों ने PM2.5 के संपर्क और मृत्यु दर के बीच सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध पाया है।

दिल्ली पर आधारित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि PM2.5 के संपर्क में प्रत्येक 25 µg/m³ वृद्धि गैर-दुर्घटनात्मक मृत्यु दर (Non-accidental Mortality) में लगभग 0.8% वृद्धि से जुड़ी थी; 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह संबंध लगभग 1.5% था। उसी अध्ययन ने अनुमान लगाया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देश स्तर तक संपर्क घटने पर अध्ययन अवधि में लगभग 17,526 समयपूर्व मौतें टाली जा सकती थीं। यह कई वर्षों की अध्ययन-अवधि का महामारी-विज्ञान संबंधी अनुमान है, 2025 की मौतों का सरकारी आंकड़ा नहीं।

एक अलग हालिया शोध विश्लेषण ने नवंबर-दिसंबर में कृषि अवशेष जलाने से जुड़े प्रदूषण के कारण दिल्ली में लगभग 1,072 प्रदूषण-जनित मौतों का अनुमान लगाया था।

“प्रदूषण से होने वाली मौतों का कोई एक आधिकारिक सालाना आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन महामारी-विज्ञान संबंधी अध्ययन PM2.5 के संपर्क को समयपूर्व मृत्यु से जोड़ते हैं।”

अब 2026-27 में क्या नया है?

  1. पार्किंग शुल्क होगा दोगुना

1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक अधिकृत पार्किंग स्थलों का मौजूदा पार्किंग शुल्क दोगुना होगा।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के स्वामित्व/प्रबंधन वाली पार्किंग इससे बाहर रहेगी। उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना है।

  1. 50% घर से काम

सरकारी और निजी कार्यालयों में 50% कर्मचारियों को घर से काम (Work From Home) और 50% को कार्यालय से काम करने का प्रावधान है।

इसका उद्देश्य कार्यालय आने-जाने और यातायात से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है।

🕐 3. कार्यालयों के समय में बदलाव

सर्दियों में व्यस्त समय के यातायात को अलग-अलग समय में बांटने के लिए:

  • MCD कार्यालय: सुबह 8:30 बजे–शाम 5 बजे
  • दिल्ली सरकार के कार्यालय: सुबह 10 बजे–शाम 6:30 बजे
  1. निर्माण और विध्वंस पर दो स्तर के प्रतिबंध

1 नवंबर 2026–31 जनवरी 2027:
धूल पैदा करने वाले विध्वंस और खुले में होने वाली नागरिक निर्माण गतिविधियों पर रोक।

10 दिसंबर 2026–20 जनवरी 2027:
निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध, आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को छोड़कर।

  1. पुराने बाहरी वाहनों पर प्रतिबंध

1 नवंबर–31 जनवरी के दौरान दिल्ली में बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। CNG और इलेक्ट्रिक वाहन तथा आपातकालीन/आवश्यक श्रेणी के वाहनों के लिए छूट है।

  1. “PUCC नहीं, ईंधन नहीं”

वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (Pollution Under Control Certificate) के बिना वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा।

यह प्रावधान पूरे साल लागू करने के लिए ढांचे में रखा गया है, सिर्फ सर्दियों के महीनों के लिए नहीं।

  1. धूल नियंत्रण और एंटी-स्मॉग उपाय

बड़े निर्माण स्थलों और वाणिज्यिक परियोजनाओं पर धूल नियंत्रण के उपाय, जिनमें एंटी-स्मॉग गन/मिस्ट सिस्टम शामिल हैं, की व्यवस्था रखी गई है। खुले में कचरा जलाने पर कार्रवाई और संस्थानों/आरडब्ल्यूए की जवाबदेही भी ढांचे का हिस्सा है।

इससे प्रदूषण कितने प्रतिशत कम होगा?

विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान की अधिसूचना में ऐसा कोई निश्चित आंकड़ा नहीं है कि:

“पार्किंग शुल्क दोगुना करने से प्रदूषण 10% घटेगा”
“50% घर से काम से प्रदूषण 20% घटेगा”
“निर्माण प्रतिबंध से प्रदूषण 30% घटेगा।”

हालांकि 2026-27 की व्यापक दिल्ली प्रदूषण कार्ययोजना में PM2.5 को 15% और PM10 को 20% तक कम करने का लक्ष्य रिपोर्ट किया गया है। इसे पूरे कार्ययोजना का लक्ष्य समझना चाहिए, केवल विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान का मापित प्रभाव नहीं।

एक और बड़ा सवाल: क्या सिर्फ दिल्ली के अंदर के कदम काफी हैं?

क्योंकि शीतकालीन PM2.5 में परिवहन और धूल के साथ जैव ईंधन जलाने और द्वितीयक कणों का भी बड़ा योगदान है। CAQM के विशेषज्ञ विश्लेषण के अनुसार सर्दियों में द्वितीयक कण 27%, परिवहन 23%, जैव ईंधन जलाना 20% और धूल 15% योगदानकर्ता रहे।

इसलिए दिल्ली में पार्किंग महंगी करना या निर्माण रोकना एक हिस्सा है; लेकिन एनसीआर स्तर के उत्सर्जन, क्षेत्रीय प्रदूषण का आवागमन, पराली जलाना, औद्योगिक उत्सर्जन और विद्युत क्षेत्र के उत्सर्जन पर कार्रवाई भी महत्वपूर्ण रहेगी।

“जनता पर क्या असर पड़ेगा?”

दिल्ली का नया विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान असल में आपातकालीन प्रतिक्रिया से रोकथाम आधारित प्रतिक्रिया की तरफ बढ़ने की कोशिश है। अब सरकार प्रदूषण के गंभीर स्तर तक पहुंचने का इंतजार करने के बजाय नवंबर से ही वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल, कार्यालय आने-जाने और पार्किंग जैसे क्षेत्रों पर प्रतिबंध लागू करेगी। लेकिन इस ढांचे की वास्तविक सफलता प्रतिबंधों की संख्या से नहीं, बल्कि PM2.5, PM10, AQI और GRAP के दिनों में आने वाले मापनीय बदलाव से तय होगी। 2026-27 की सर्दियां इस नीति के लिए पहला बड़ा परीक्षण होंगी।

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