नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक तेल सप्लाई पर बढ़ते दबाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने दुनिया के कई देशों को 30 दिनों के लिए रूसी कच्चा तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी है। माना जा रहा है कि इस फैसले का मकसद वैश्विक बाजार में तेल की कमी को कुछ हद तक कम करना और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाना है।
दरअसल, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर सीधे तेल बाजार पर पड़ रहा है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है और आमतौर पर दुनिया की करीब 20 से 25 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। इस रास्ते पर तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
इसके साथ ही अमेरिका ने अपने रणनीतिक तेल भंडार से भी कच्चा तेल जारी करने का फैसला किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार करीब 172 मिलियन बैरल तेल बाजार में लाया जाएगा, ताकि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ मिलकर उठाया जा रहा है, जिसमें सदस्य देश मिलकर करीब 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करने की योजना बना रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और जहाजों पर हमलों के बाद कीमतों में तेजी आई है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कब कम होगा और तेल सप्लाई कब सामान्य हो पाएगी।
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