नई दिल्ली: ईरान की ओर से अमेरिकी प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए मजलिस के स्पीकर मोहम्मद-बघर गालिबफ को आगे किया गया है। वह इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं और आने वाले दिनों में बातचीत का अहम हिस्सा बनने वाले हैं। कालिबाफ का नाम पहले भी वार्ता के लिए सामने आया था और उन्हें एक मजबूत लेकिन संतुलित नेता माना जाता है।
गालिबफ सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें ईरान में ‘मास्टर ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर’ के तौर पर भी पहचान मिली है। उनके नेतृत्व में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे हुए, जिनमें मशहद-सरख्स रेलवे लाइन खास तौर पर शामिल है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ यात्री सेवाओं के लिए अहम रहा, बल्कि इससे माल ढुलाई और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत हुई।
इसी वजह से उनकी तुलना भारत के ‘मेट्रो मैन’ ई. श्रीधरन से की जाती है। जिस तरह श्रीधरन ने दिल्ली मेट्रो और कोंकण रेलवे जैसे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर पहचान बनाई, उसी तरह कालिबाफ ने भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी और कुशलता से पूरा किया।
हालांकि हालिया घटनाओं में जिन सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को अमेरिका ने निशाना बनाया, उनमें कई ऐसे ढांचे भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनसे कालिबाफ का जुड़ाव रहा है। ऐसे में उनके लिए यह बातचीत सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी अहम मानी जा रही है।
गालिबफ की छवि एक ऐसे नेता की है जो कट्टर रुख से अलग विकास और प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही कारण है कि उन्हें इस संवेदनशील समय में बातचीत के लिए चुना गया है। अब देखना होगा कि क्या उनकी मौजूदगी दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में कोई सकारात्मक भूमिका निभा पाती है या नहीं।
यह बातचीत सिर्फ दो देशों के बीच संवाद नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की भी परीक्षा है जिसने विकास के कई बड़े मॉडल खड़े किए और अब उन्हीं के बीच खड़े होकर समाधान खोजने की कोशिश कर रहा है।
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