नई दिल्ली: Strait of Hormuz वैश्विक तेल सप्लाई की लाइफलाइन माना जाता है। खाड़ी देशों से दुनिया भर में जाने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इस रूट को बेहद असुरक्षित बना दिया है। हालात ऐसे हैं कि अगर यह रास्ता खुल भी जाए, तब भी तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम है।
दरअसल, समस्या सिर्फ रास्ता बंद होने की नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी में सैकड़ों तेल टैंकर फंसे हुए हैं, जो बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ खाली जहाज अंदर जाने से डर रहे हैं। जब तक ये खाली टैंकर वापस नहीं जाएंगे, तब तक तेल की नई सप्लाई शुरू नहीं हो पाएगी।
शिपिंग कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा को लेकर है। जब तक उन्हें यह भरोसा नहीं हो जाता कि हालात पूरी तरह सामान्य हैं और युद्धविराम लंबे समय तक टिकेगा, तब तक वे अपने जहाजों को जोखिम में नहीं डालेंगी। ऐसे में भले ही हॉर्मुज खुल जाए, लेकिन जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में समय लगेगा।
इसका असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। खाड़ी देशों से खाद और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई भी इसी रास्ते से होती है। अगर जहाज अंदर नहीं जाएंगे, तो इन जरूरी चीजों की कमी भी बढ़ सकती है। इससे कई देशों में महंगाई और संकट गहराने का खतरा है।
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इसके उलट सख्त बयानबाजी और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका ने हालात को और जटिल बना दिया है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है, जहां तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है।
हॉर्मुज का खुलना ही समाधान नहीं है। जब तक सप्लाई चेन पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटती और जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होती, तब तक दुनिया को महंगे तेल और जरूरी सामान की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
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