तहलका डेस्क
पुणे/नई दिल्ली। पुणे के भोर तहसील में एक चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। एक 65 वर्षीय वृद्ध द्वारा भोजन का लालच देकर बच्ची को मवेशियों के बाड़े में ले जाना, उसका यौन उत्पीड़न करना और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर देना, आधुनिक समाज के चेहरे पर एक काला धब्बा है। यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे और न्याय प्रणाली की विफलता का जीवंत प्रमाण है।
सीसीटीवी फुटेज ने अपराधी को बेनकाब तो कर दिया, लेकिन यह सवाल जस का तस है कि 1998 और 2015 जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त रहने वाला यह ‘हिस्ट्रीशीटर’ खुलेआम समाज के बीच कैसे घूम रहा था? कानून की कमियों का फायदा उठाकर दो बार बरी होने वाले इस अपराधी ने एक बार फिर कानून की धज्जियां उड़ाई हैं।
इस घटना के बाद उपजा जनआक्रोश स्वाभाविक है। मुंबई-बेंगलुरु राजमार्ग को अवरुद्ध कर न्याय की गुहार लगाते ग्रामीणों का गुस्सा पुलिसिया आश्वासनों तक सीमित नहीं रहने वाला। हालांकि पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने 15 दिनों में आरोपपत्र दाखिल करने और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का वादा किया है, लेकिन न्याय में देरी ही ऐसे अपराधों को खाद-पानी देती है।
वहीं, इस त्रासदी ने राजनीतिक गलियारों में ‘शक्ति अधिनियम’ को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख का यह आरोप कि केंद्र और राज्य सरकार इस कड़े कानून को लागू करने के बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं, सिस्टम की उदासीनता को दर्शाता है। यदि शक्ति विधेयक जैसी कठोर कानूनी व्यवस्था लागू होती, तो शायद अपराधी के मन में कानून का वह खौफ होता जो उसे इस घिनौने कृत्य से रोकता।
महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर हुई यह शर्मनाक घटना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा के दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। अब समय केवल त्वरित सुनवाई का नहीं, बल्कि ऐसे नरपिशाचों के लिए नजीर बनने वाली सजा और अधर में लटके कानूनों को धरातल पर उतारने का है।
-------------------------------
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें। Pavitra India पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
Facebook | Twitter | Instragram | YouTube
-----------------------------------------------
. . .