तहलका डेस्क।
नई दिल्ली, 8 मई 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और श्रद्धालुओं के लिए इसके पुनः समर्पण के 75 वर्ष पूरे होने पर देश के नाम एक विशेष संदेश साझा किया है।
प्रधानमंत्री ने भारत को एकता की एक ऐसी शाश्वत डोर से बंधा हुआ बताया है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की विभाजित दुनिया में सोमनाथ से मिलने वाली एकता की सीख और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है।
प्रधानमंत्री 11 मई को इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने के लिए पुनः सोमनाथ धाम पहुंचेंगे।
विरासत के रक्षकों का स्मरण और अनुष्ठान
अपने आलेख में प्रधानमंत्री ने उन वीरों और मनीषियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने आक्रांताओं के सामने झुकने के बजाय मंदिर की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने लकुलीश, सोम शर्मा, अहिल्याबाई होल्कर और सरदार पटेल जैसी विभूतियों के योगदान को रेखांकित किया।

इसी गौरवशाली इतिहास को नमन करने के लिए सोमनाथ में अगले एक हजार दिनों तक विशेष पूजा आयोजित की जाएगी। मोदी ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता का वह अटूट संकल्प है, जिसे कोई भी आंधी मिटा नहीं सकी।
सरदार पटेल का स्वप्न और ‘विकास भी, विरासत भी’ का संकल्प
प्रधानमंत्री ने 1947 में सरदार पटेल द्वारा लिए गए पुनर्निर्माण के संकल्प को याद करते हुए बताया कि कैसे तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के विरोध के बावजूद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर के लोकार्पण समारोह में हिस्सा लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले एक दशक से केंद्र सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र पर चलते हुए काशी, अयोध्या और केदारनाथ जैसे केंद्रों का कायाकल्प कर रही है। मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे सोमनाथ की यात्रा करें और उस अपराजित भारतीय आत्मा का अनुभव करें, जिसने हर आघात के बाद खुद को और भव्य रूप में स्थापित किया है।
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