राघवेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। बीजेपी सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान के पक्ष में ज़िंदाबाद के नारे लगाए। शॉल और पगड़ी पहना कर स्वागत किया। जबकि विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ ‘पेपर चोर’ के नारे लगा कर निशाना साधा।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश और धर्मेंद्र प्रधान के बीच हुआ संवाद ने सुर्खियां बटोर लीं। दरअसल जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो परिसर में ही उनके समर्थक सांसदों ने ज़िन्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। कुछ विपक्षी सांसद भी सहानुभति जताने आ गए। जयराम रमेश भी प्रधान से सहानुभूति प्रकट करने पहुंचे और उनसे कहा कि “ऐसा होता रहता है” बस इसी पर धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब देते हुए कहा कि “मैं स्ट्रीट फाइटर हूँ। एसी रूम एक्टिविस्ट नहीं”
धर्मेंद्र प्रधान का ये बयान एक गहरे तंज़ के तौर पर देखा गया। राज्यसभा सांसद जयराम रमेश कांग्रेस में”एलीट क्लास” के नेता माने जाते हैं। सड़क पर संघर्ष करने और जुझारू नेता की छवि नहीं रही। दूसरी तरफ मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों का कहना है कि जयराम रमेश के बयान का मतलब वाकई सीधा और सपाट हो लेकिन शायद प्रधान ने उनके बयान को तंज़ के तौर पर महसूस किया और उसके बाद उन्होंने जो कहा उसे बार पर पलटवार के तौर पर देखा गया।
जंतर मंतर पर 36 दिनों तक चले कॉकरोच जनता पार्टी के धरना प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। मंत्री पद से उनका इस्तीफा होने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान बतौर मंत्री नहीं, सांसद के तौर पर पहली बार संसद पहुंचे थे। इस दौरान बीजेपी सांसदों ने उनका भव्य स्वागत किया। बिहार के दरभंगा से लोकसभा सदस्य गोपालजी ठाकुर ने उन्हें ‘पाग’ (मिथिला की पारंपरिक टोपी) पहनाई। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसको लेकर ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि बीजेपी सांसद प्रधान का स्वागत ऐसे किया जा रहा है कि मानो उन्होंने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की हो। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस नेता को करारा जवाब दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि मैं स्ट्रीट फाइटर हूं। कांग्रेस ने उन पर RSS का एजेंडा लागू करने का आरोप लगाया। इसी बीच सरकार ने लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए नया संशोधन विधेयक पेश किया, जिसमें 10 साल तक की जेल, 50 लाख रुपये जुर्माना और दो महीने में जांच पूरी करने का प्रावधान किया गया है। संसद में बिल पर चर्चा हो इसके लिए सरकार की तरफ से फ्लोर मैनेजर सक्रिय दिखे लेकिन 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा जो बल प्रयोग किया गया विपक्ष उस पर गृहमंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक अमित शाह बयान नहीं देंगे तब तक सदन में चर्चा नहीं होने देंगे।
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