“किसी राष्ट्र की महानता और उसकी नैतिक प्रगति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहाँ जानवरों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।” महात्मा गांधी
अरविंन्द चतुर्वेदी –
65 हाथियों की जान किसने बचाई ,तकनीक ने या मानव ने या दोनों ने यह कहानी पूरी फिल्मी है –
19 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 4:57 बजे असम के होजाई जिले (हवाईपुर इलाके) में एक बड़ी प्राकृतिक आपदा टल गई। हाथियों का एक विशाल झुंड जिसमें छोटे बच्चे भी शामिल थे रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। उसी समय नई दिल्ली की ओर जाने वाली डाउन डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस (20503) अपनी पूरी गति से आगे बढ़ रही थी।फोरेस्टर-1 शशांक राय ने पटरियों पर हाथियों का झुंड और ट्रेन की गड़गड़ाहट सुनते ही अपनी जान जोखिम में डाल दी। उन्होंने तुरंत टॉर्च की फ्लैशलाइट और लाल सिग्नल दिखाकर लोको पायलट को खतरे से आगाह किया।नगांव साउथ फॉरेस्ट डिवीजन की लंका रेंज के RFO माणिक बरूआ और उनकी गश्ती टीम ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत लुमडिंग रेलवे कंट्रोल रूम को एमरजेंसी अलर्ट भेजा।भोर के अंधेरे में लोको पायलट ने दूर से दिख रहे लाल सिग्नल को तुरंत पहचान लिया। बिना एक पल गंवाए इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को हाथियों के झुंड से सुरक्षित दूरी पर रोक दिया गया।
होजाई में कैसे टला बड़ा हादसा?
कंट्रोल रूम और क्रू की इस सतर्कता के परिणामस्वरूप, सभी 65 हाथी सुरक्षित रूप से ट्रैक पार कर गए। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पर्यावरण मंत्री ने सोशल मीडिया (X) पर इस साहसिक कार्य की खुलकर सराहना की है।
तकनीक का कमाल: ‘गजराज सुरक्षा’ (AI-आधारित IDS)
‘गजराज सुरक्षा’ IDS क्या है और हाथियों को कैसे बचाती है?
असम में हाथियों को बचाने के लिए रेलवे द्वारा लागू की गई इंट्रूडर डिटैक्शन सिस्टम (IDS) यानी ‘गजराज सुरक्षा’ प्रोजेक्ट गेम-चेंजर साबित हो रहा है ।पटरियों के किनारे पहले से बिछे दूरसंचार केबलों का उपयोग सेंसर के रूप में किया जाता है।जब हाथी ट्रैक के 200 मीटर के दायरे में आते हैं, तो उनके वजन से उत्पन्न कंपन को तकनीक तुरंत पकड़ लेती है।सिस्टम यह पहचान लेता है कि कंपन हाथी का है या किसी वाहन/ट्रेन का, जिससे फॉल्स अलार्म (False Alarm) की गुंजाइश खत्म हो जाती है।एआई की पुष्टि के बाद लोको पायलट के केबिन और स्टेशन मास्टर को ऑडियो-विजुअल अलर्ट मिल जाता है, जिससे ट्रेन को समय रहते रोका जा सकता है।
सबक और आंकड़े: 2025 बनाम 2026
यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि बीते समय में ऐसे हादसे दर्दनाक रहे हैं।
2025 की दुर्घटना के बाद क्यों अहम है होजाई की यह घटना
20 दिसंबर 2025 को तड़के इसी होजाई जिले (जमुनामुख-कामपुर सेक्शन) में सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आने से 7 हाथियों की मौत हो गई थी और ट्रेन के डिब्बे भी पटरी से उतर गए थे।
लोको पायलटों की मुस्तैदी, वन विभाग के सहयोग और आधुनिक AI तकनीक (IDS) के कारण वर्ष 2026 में अब तक ट्रेन दुर्घटना से हाथियों की मौत की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है।
भारतीय संस्कृति और प्राचीन ग्रंथों में हाथियों को हमेशा उच्च स्थान और सम्मान दिया गया है:
ऐश्वर्यस्य समग्रस्य धर्मस्य यशसः श्रियः। गजः प्रियो हि वाह्येषु राज्ञां विजयदायकः।। (अर्थात्: ऐश्वर्य, धर्म, यश और श्री के प्रतीक तथा राजाओं को विजय दिलाने वाले वाहनों में हाथी सबसे प्रिय और श्रेष्ठ माने गए हैं।)
-------------------------------
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें। Pavitra India पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
Facebook | Twitter | Instragram | YouTube
-----------------------------------------------
. . .