नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान आम लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। Nirmala Sitharaman ने हाल ही में बताया कि सरकार ने पुराने ऑयल बॉन्ड का पूरा कर्ज चुका दिया है। ऐसे में अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अब पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
दरअसल, ऑयल बॉन्ड वो उधार था जो पहले की सरकार ने तेल कंपनियों को सब्सिडी देने के लिए लिया था। यह कर्ज बाद में सरकार को ब्याज समेत चुकाना पड़ता था। मौजूदा सरकार का कहना था कि इसी बोझ की वजह से कीमतें कम नहीं की जा रही थीं। अब जब यह कर्ज खत्म हो चुका है, तो राहत की उम्मीद बढ़ गई है।
लेकिन असली तस्वीर थोड़ी अलग है। जानकारों का मानना है कि सिर्फ ऑयल बॉन्ड खत्म होने से पेट्रोल-डीजल सस्ता होना तय नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह है टैक्स। केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स वसूलती हैं, जो कीमत का बड़ा हिस्सा होता है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत भी अहम भूमिका निभाती है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए अगर वैश्विक कीमतें ज्यादा हैं, तो उसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी कीमत तय करने में असर डालती है।
एक और कारण तेल कंपनियों का मार्जिन है। कई बार कंपनियां पुराने घाटे की भरपाई के लिए भी कीमतें तुरंत कम नहीं करतीं। ऐसे में भले ही सरकार पर से ऑयल बॉन्ड का बोझ हट गया हो, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत कम होंगे, इसकी गारंटी नहीं है।
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